उम्र हो चली है

उम्र हो चली है शायद, आँखे धुँधलाने लगे हैं, तुम्हारे फोटो फ्रेम को पकड़े, जब भी अतीत में झाँकता हूँ, लगता है कि जिन्दगी का सिरा कहीं छूट गया हो । वो सिरा, वो धागा, जिसमे पिरोया था एक रिश्ता, बिना गिरह का, कच्चा तागा, जिसको खिंच-खिंच के हमने बना ली चादर, जब चाहा बिछाया-ओढ़ा, … Read moreउम्र हो चली है

गायत्री मंत्र

कुछ अजीब सा वाकया हुआ । ठमेल जाना कभी भी बहुत पसंद नही आया मुझको । हालांकि मेरे ज्यादातर दोस्त इस बात से इत्तफाक ना रखें, क्यूंकि अमूमन मेरे दोस्त मुझे अक्सर यहीं मिला करते हैं । फिर भी ये कहना जरुरी समझता हूँ, ये जगह मुझे कुछ खास आकर्षित नहीं करती, खासकर पिछले कुछ … Read moreगायत्री मंत्र

ख्वाब…

ख्वाब आते हैं और जगाते हैं अधखुली नींद और बन्द सी पलकों के भीतर से दिखता है कि जैसे आप का साया, आप की परछाई बगल में बैठा सहला रहा हो मेरे बिगड़े हुए बालों को कंघी की तरह उसमे आइ सिलवटों को एक सीध में करते जैसे अब मेरी मासूमियत ढूंढ रहा हो कंघी … Read moreख्वाब…

छोड़ दिया खत लिखना

छोड़ दिया खत लिखना डाक्टर बोलता है : खून कम है बदन में… उसे क्या मालूम दिल सिर्फ पम्प नहीं है न धड़कन, घड़ी की टिक टिक…   अरे नादान… नब्ज पकड़ के कहीं, दर्द दिखता है भला जब तक जज्ब ना पकड़ा, तुम मर्ज क्या जानो…   खून का कम होना, क्या लाजमी नहीं … Read moreछोड़ दिया खत लिखना